नारीवाद

नारीवाद वह विचारधारा है जो महिलाओं को समाज में समानता दिलाने की बात करती है। नारीवाद से अभिप्राय केवल अधिकार सुनिश्चित करना ही नहीं बल्कि उन अधिकारों को व्यवहार में लाना और हर व्यक्ति को इन अधिकारों से अवगत कराना नारीवादी विचारधारा का लक्ष्य होना चाहिए ।

नारीवाद शब्द के अर्थ को कई लोग समझते हैं कि यह वह विचारधारा है जो केवल महिलाओं को सशक्त बनाने पर बल देती है लेकिन यह केवल एक मिथ्या है। सच यह है कि यह विचारधारा हर उस समुदाय के अधिकार की बात करती है जो शोषित और वंचित है, वे अधिकार जो उन्हें आजतक नहीं मिले। लेकिन वही अधिकार पुरुषों के लिए आम बात है। इसलिए नारीवाद उन अधिकारों को महिलाओं के लिए सुनिश्चित करने पर बल देता है, जिन अधिकारों का उपभोग पुरुष जन्म से करता आया है।

समावेशी नारीवाद वह विचारधारा है जो केवल महिला और पुरुष के बीच बराबरी की ही बात नहीं करता बल्कि समाज के हर उस तबके को समानता दिलाने पर बल देता है जो हाशिए पर है। अगर हम केवल नारीवाद की बात करें तो यह महिलाओं की व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक समानता की बात करता है और हर उस बाधा को हटाने पर ज़ोर देता है जो इन महिला और पुरुषों के बीच असमानता पैदा करती है। दूसरी तरफ समावेशी नारीवाद की बात करें तो यह समाज में व्याप्त हर नस्ल, लिंग, रंग, जाति, धर्म, वर्ग, यौनिकता के आधार पर लोगों को समान अधिकार और समान अवसर प्रदान करने पर बल देता है।

नारीवाद विचारधारा का ये मतलब कतई नही है कि -पुरुषों के कुकर्मों का ,पुरुषो से कुकर्म करके बदला लेना या पुरुषो को प्रताड़ित करना,।बल्कि महिलाओं को समान अधिकार देना ,उनको अपने व्यवहार में लाना तथा उनके हितों को सरंक्षित करना!

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