होता नहीं एेसा यकसर

होता नहीं एेसा यकसर कभी

की बात उनकी चले और उन तक ना पहुँचे

याद उनकी आए और दस्तक उनकी हो।

होता नहीं एेसा यकसर कभी

कि पैमाना लब छुए और जिक्र उनका ना छिडें

सदके मे पलकें झुके और सामने वो हो।

होता नहीं एेसा यकसर कभी

कि समुद्रों ने दूरी मिटाई हो

एक लहर यहाँ से उठे और लौटकर साथ वो आए हो।

होता नहीं एेसा यकसर कभी

कि इज़हार कर के इनकार वो कर जाए

इक़रार कुबूल कर मुकर भी वो जाए।

होता नहीं एेसा यकसर कभी

कहे वो हमसे करते है बैर

मुँह फेरकर एेसे चले, कि मुडे़ ना कभी फिर इस ओर।

होता नहीं एेसा यकसर कभी

हम कोशिश करे भूला देने की उन्हें

ओर हो जाए ये भी एक रोज़ सच

होता नहीं एेसा यकसर कभी…💫

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