कुछ बातें…

वो जो किताबों में नहीं लिखा जा सका,

वो बातो में कहा गया;

वो जो अनसुनासा था, सुना गया ;

चाय कें ठडें होने तक,

शाम के रात में ढल जाने तक,

अनंजान चहरों के आकर चले जाने तक, और वक्त के पुराने हो जाने तक;

बातों में सब कहा गया,

जो शायद कभी लिखा नहीं जाएगा💫

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